Nazar Chahti Hai Deedar Karna,
Dil Chahta Hai Pyaar Karna,
Kya Bataoon Is Dil Ka Aalam,
Nasib Me Likha Hai Intezar Karna…♥️
नज़र चाहती है दीदार करना
दिल चाहता है प्यार करना
क्या बताऊं इस दिल का आलम
नसीब में लिखा है इंतजार करना…♥️
Nazar Chahti Hai Deedar Karna,
Dil Chahta Hai Pyaar Karna,
Kya Bataoon Is Dil Ka Aalam,
Nasib Me Likha Hai Intezar Karna…♥️
नज़र चाहती है दीदार करना
दिल चाहता है प्यार करना
क्या बताऊं इस दिल का आलम
नसीब में लिखा है इंतजार करना…♥️
Nahi pata kinjh ijhhaar me
bulla te gal aundi aundi reh je
das kive byaan karaa me param
eh kamla dil kise da gulaa na hoyea
tera ho baitha
das kive ehnu azaad karaa
ਨਹੀਂ ਪਤਾ ਕਿੰਝ ਇਜ਼ਹਾਰ ਮੈਂ
ਬੁੱਲਾਂ ਤੇ ਗੱਲ ਆਉਂਦੀ ਆਉਂਦੀ ਰਹਿ ਜੇ
ਦੱਸ ਕਿਵੇਂ ਬਿਆਨ ਕਰਾਂ ਮੈਂ param
ਇਹ ਕਮਲ਼ਾ ਦਿਲ ਕਿਸੇ ਦਾ ਗੁਲਾਮ ਨਾਂ ਹੋਇਆਂ
ਤੇਰਾ ਹੋ ਬੈਠਾ
ਦੱਸ ਕਿਵੇਂ ਇਹਨੂੰ ਆਜਾਦ ਕਰਾਂ
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”