Ye intzar kyu hota kisi k liye,
Aaj nahi to kal jaana hi hey,
Jindgi k raaho me kabhi baitha karte they,
Aaj unhi k palko k liye intzar kar baithe.
Ye intzar kyu hota kisi k liye,
Aaj nahi to kal jaana hi hey,
Jindgi k raaho me kabhi baitha karte they,
Aaj unhi k palko k liye intzar kar baithe.
रोशनी भरी थी राहें मेरी, जाने कब अंधेरी हो गई..
मंजिल की तलाश में राहों से यारी, और भी गहरी हो गई..
जिन मंजिलों से लेना-देना ना था, वो बदली और मेरी हो गई..
गैर मंजिलों को इतना वक्त दिया के, खुद मंजिल मेरी खो गई..
खैर कोशिशों में कोई कमी ना थी, जो नाकाम मेरी हो गई..
मेरी मंजिल की तलाश अब भी जारी है, भले क्यूं ना देरी हो गई..
भले क्यूं ना देरी हो गई..
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..