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Ishq shayari vich lang jani rehndi zindagi aa || punjabi poetry

ਦੁੱਖ ਸੁੱਖ ਇਕੋ ਛੱਤ ਹੇਠਾਂ, ਨਾ ਹੀ ਪੱਕਾ ਟਿਕਾਣਾ
ਦਰਦ ਚੌਖਟ ਖੜੇ ਦਰ ਮੇਰੇ, ਸਾਡੀ ਪਹਿਚਾਣ ਗੁੰਮਨਾਮ ਪਰਿੰਦਾ
ਇਸ਼ਕ ਸ਼ਾਇਰੀ ਵਿੱਚ ਲੰਘ ਜਾਨੀ ਰਹਿੰਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਆ

ਬਹੁਤੇ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਨਹੀਂ, ਨਾ ਪਸੰਦ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਅਸੀਂ
ਬਥੇਰੇ ਖੋਟ ਨੇ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ, ਮੱਤਲਬ ਕੱਢਕੇ ਵਰਤ ਲੈਂਦੇ ਲੋਕੀ
ਇਸ਼ਕ ਸ਼ਾਇਰੀ ਵਿੱਚ ਲੰਘ ਜਾਨੀ ਰਹਿੰਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ

ਗਲਤੀ ਹੋਰ ਦੀ, ਭੁਗਤਾਨ ਕਰੇ ਕੋਈ
ਇਹ ਗੱਲ ਨਹੀ ਸੋਹਣੀ, ਖੱਤਮ ਹੁੰਦੀ ਜਾਵੇਂ ਅੱਖਾਂ ਦੀ ਰੌਸ਼ਨੀ
ਇਸ਼ਕ ਸ਼ਾਇਰੀ ਵਿੱਚ ਲੰਘ ਜਾਨੀ ਰਹਿੰਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ

ਖੱਤਰੀ ਪਿਆ ਹੁਣ ਸੋਚੇ, ਕਿ ਕਹਿ ਰਹੀ ਹੱਥ ਦੀ ਲਕੀਰ
ਵੱਕਤ ਹੀ ਆ ਸੱਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ, ਪੈਸਾ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦੇ ਫ਼ਕੀਰ
ਇਸ਼ਕ ਸ਼ਾਇਰੀ ਵਿੱਚ ਲੰਘ ਜਾਨੀ ਰਹਿੰਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਆ

✍️ ਖੱਤਰੀ

Title: Ishq shayari vich lang jani rehndi zindagi aa || punjabi poetry

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Phoolo ne kabhi || Shayari

फूलों ने कभी तोड़ने का दर्द कहा है,
कांटों ने ही हमेशा दुश्मनी निभाई है;
मोहब्बत भी फना का ही एक और नाम है,
यह रूसवा तो​ हुई है, पर इसने हमेशा वफादारी निभाई है।

ऐ चांद तेरे आने का सबब सबको मालूम नहीं,
कुछ लोग दिया जलाते हैं, और कुछ दिल जलाते हैं;
या वो अच्छी हैं या बुरी, हसरतें तो अपनी हैं,
मगर लोग अक्सर दाग तुझ पर लगाते हैं।

ऐ मेरे दोस्त तू समन्दर बन जा,
क्या खोया क्या पाया इसकी चाहत न कर;
तेरे अंदर ही एक मुकम्मल जहां है,
तू बाहर से किसी और की आस न कर।

मुमकिन है कि मंजिलें मुझसे दूर बहुत हैं,
पर रास्ते पर चलना मेरी फितरत बन गयी है;
उजाले समेटने में कोई वाहवाही नहीं,
अन्धेरों में रोशनी करना मेरी आदत बन गयी है।

ऐसे चलो कि चल के फिर गिरना न पड़े,
इतना उठो कि उठ के फिर झुकना न पड़े;
लेकिन गिरना, उठना तेरे बस में नहीं ऐ दोस्त,
इसलिए उसका हाथ पकड़ के चलो कि फिर रोना न पड़े।

मां के हाथों की बरकत का अंदाजा इस से हो गया,
थी एक वक्त की रोटी हर रोज,
और तीस वर्ष तक गुजारा हो गया;
आज रोटी तो है हर वक्त की, लेकिन वो वक्त कहीं पर खो गया।

ऐ जिंदगी, ये तेरे सवाल की तारीफ नहीं,
यह मेरे जवाब का हुनर कि जिंदगी की उलझने सुलझती चली गयीं;
मैं तो बस अपने दिल की कह रहा था,
और कहानियां बनती चली गयीं।

न थी जिंदगी से शिकायत,
न वक्त से कुछ गिला था;
जो मुझको नहीं मिला,
वो खुद मेरा ही सिला था;
मदद-ओ-मशवरे कम नहीं थे मददगारों के,
पर अफसोस जो तकदीर ने दिया था वह दर्द ही मुझे मिला था।

ऐ वतन कर्ज तो तेरा मैं जब उतारूं, जब मेरे पास कुछ अपना भी हो; तेरी मिट्टी, तेरा पानी, तेरी हवा, तेरी धूप, तेरी छांव, तेरी रोटी और नाम तेरा, फिर भी बस एक कतरा ही बन पाउं तेरा, तो मैं समझूं और तुझको मैं अपना पुकारूं।

जिंदगी जीने का अंदाज तो आया मगर अफसोस,
वो मुकम्मल एहसास नहीं आया;
वो हुनर तो आया मगर,
ऐ बदनसीबी वो मुकाम कभी नहीं आया।

यूं गलतफहमियां पाला न करो,कभी आईने में खुद को निहारा भी करो; ये जो चेहरा है वो सब कुछ बयां कर देता है; कभी इसको जुबां पर उतारा भी करो।

आशुतोष श्रीवास्तव

Title: Phoolo ne kabhi || Shayari


maa baap da vichhodha || Punjabi shayari for parents

Likhan waaleyaa ho ke dyaal likh de
ik likhi na maa baap da vichhodha
Hor Bhawe dukh hazaar likh de

ਲਿਖਣ ਵਾਲਿਆ ਹੋ ਕੇ ਦਿਆਲ ਲਿਖ ਦੇ
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਮੇਰੇ ਮਾਾਂ ਬਾਪ ਦਾ ਪਿਆਰ ਲਿਖ ਦੇ
ਇੱਕ ਲਿਖੀ ਨਾ ਮਾਂ ਬਾਪ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ
ਹੋਰ ਭਾਵੇ ਦੁੱਖ ਹਜ਼ਾਰ ਲਿਖ ਦੇ

Title: maa baap da vichhodha || Punjabi shayari for parents