“Itni bandagi ke bad bhi, kuch khas he tera muze chahana,
Har waqt tuzase judne ka, dil dhundta he koi bahana”
“Itni bandagi ke bad bhi, kuch khas he tera muze chahana,
Har waqt tuzase judne ka, dil dhundta he koi bahana”
कुछ नए अहसास लिए फिरता है,
ये दिल मेरा अजीब से जज्बात के लिए फिरता है,
समझ में नहीं आ रहा चल क्या रहा है,.
कुछ तो अजीब से सवाल के लिए फिर रहा है🥀
हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिला
मिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिला
वैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिला
कुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिला
एहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला
तरुण चौधरी