Jaana tan pena ye Zindagi hove yaa kise toh door
Marna tan pena ye itho ya kise te hoke majboor
Jaana tan pena ye Zindagi hove yaa kise toh door
Marna tan pena ye itho ya kise te hoke majboor
किसी को रफ्ता-रफ्ता चाहा था , अब किश्तों में मरते हैं ।
कैसे कहें अपना हाल-ए-दिल , क्या बताएँ कि हम मोहब्बत करते हैं ।।
ईश्क की सौदेबाजी में , नीलाम हो गई चाहते मेरी ।
नफा-नुकसान के फासलों में , उम्मीद की गुंजाइश ढूँढा करते हैं ।।
ख्वाबों के शहर में , चाहत का एक ख्याल आया ।
कई जवाबों के बाद , संगीन एक सवाल आया ।।
रूखसत किया जिसे , जिसकी पसंद से हमने ।
वो जो शख्स था , मेरी कई इबादतों के बाद आया ।।❤️🍂
Mein ishq kita fir bheekh kahdi
Mein shadd ditta fir udeek kahdi
ਮੈਂ ਇਸ਼ਕ਼ ਕੀਤਾ ਫਿਰ ਭੀਖ ਕਾਹਦੀ
ਮੈਂ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਫਿਰ ਉਡੀਕ ਕਾਹਦੀ