जब तिरछी नजरों से उन्होंने हमको देखा,
तो हम मदहोश हो गए
जब पता लगा उनकी नज़रें ही तिरछी हैं
तो हम बेहोश हो गए।
जब तिरछी नजरों से उन्होंने हमको देखा,
तो हम मदहोश हो गए
जब पता लगा उनकी नज़रें ही तिरछी हैं
तो हम बेहोश हो गए।
Girte patton se shakhon ke berang nazare hain
Lehron ki khanak sunne ko betaab kinare hain
Murjha gayi hain kaliyan bhi do boond pani ki aas mein
Mitti ki khoobsurti ab bejaan foolon ne saware hain…💯
गिरते पत्तों से शाखों के बेरंग नज़ारे हैं,
लहरों की खनक सुनने को बेताब किनारे हैं,
मुरझा गई हैं कलियाँ भी दो बूँद पानी की आस में,
मिट्टी की खूबसूरती अब बेजान फूलों ने सवारे हैं…💯
जाने कहाँ बैठकर देखती होगी, वो आज जहां भी रहती है..
नाराज़ है वो किसी बात को लेकर, सपनों में आकर कहती है..
मैं याद नहीं करता अब उसको, चुप-चाप देखकर सहती है..
वो चली गई भले दुनिया से, मेरे ज़हन में अब भी रहती है..
उसे चाहता हूँ पहले की तरह, ये तो वो आज भी कहती है..
किसी और संग मुझे देख-ले गर जो, वो आज भी लड़ती रहती है..
ना वो भूली ना मैं भुला, भले भूल गई दुनिया कहती है..
रहती थी पहले भी पास मेरे, मेरे साथ आज भी रहती है..