Jahan yaad na aaye teri,
Woh tanhaai kis kaam ki.
Bigde rishte na bane,
To khudaai kis kaam ki.
Beshak apni manzil tak jana hai hamein,
Lekin jahaan se apne na dikhein,
Woh oonchaai kis kaam ki..!
Jahan yaad na aaye teri,
Woh tanhaai kis kaam ki.
Bigde rishte na bane,
To khudaai kis kaam ki.
Beshak apni manzil tak jana hai hamein,
Lekin jahaan se apne na dikhein,
Woh oonchaai kis kaam ki..!
मैं ना जानू दोस्त तेरे दूर हो जाने के बाद,
यह जिंदगी कैसे जंग बन गई है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
यह गांव की गलियां कैसे सुनी हो गई है।
मैंने जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
वो खेल का मैदान अब सुना लगता है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
कैसे फूल जैसी जिंदगी पत्थर बन गई है।
खुद को मनाने की कोशिश करता हूं बहुत,
लेकिन क्या करूं दिल है कि मानता ही नहीं।
मैं ना जानू दोस्त तेरी दूर हो जाने के बाद,
मेरे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
बाजारों की रौनक भी फीकी लगती है।
तू कब आएगा मेरे भाई मेरे दोस्त,
तेरे को हर दिन गले लगाने का मन करता है।
Ham Qurbat Samajh Baithe,
Magar Unki To Riwayat Hi Kuchh Aur Thi…