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ईद के ख़ास मौक़े पर कोई ख़ुदाई से मिले || Pure love hindi shayari
ईद के ख़ास मौक़े पर कोई ख़ुदाई से मिले,
दुश्मन – दुश्मन से मिले भाई – भाई से मिले
दुनियां वालों तुम्हें क्यों जलन होती है अग़र,
मुस्लिम सीख़ से मिले या सीख़ ईसाई से मिले
उस बंटवारे को अल्लाह भी क़बूल नहीं कर्ता,
जो हिस्सा इंसानों को ख़ून की लड़ाई से मिले
ग़ले ज़रूर मिलो मग़र ग़ला काटने के लिए नहीं,
क़ल को क्या पता किसका वक़्त जा बुराई से मिले
ये शायर तेरा आशिक़ है एक ही बात कहता है
हमसे जब भी जो भी मिले दिल की गहराई से मिले
Title: ईद के ख़ास मौक़े पर कोई ख़ुदाई से मिले || Pure love hindi shayari
Me akela nahi hu || hindi shayari
पाव उठाऊ तो हर कदम पे एक दरिया जकड़ लेता है
गिराकर मुझे हरबार हवाओं से मिलकर अकड़ लेता है,
छोड़ दूं मुठ्ठी भर सपने मैं बुजदिल नही,
मान जाए तन मेरा पर मेरा दिल नहीं,
हर मोड़ पर मुझे ऐसे ही सताएंगे,
गिराकर मुझे खुद मुस्कुराएंगे,
तुम्हारे लिए मैं पहला नहीं हूं,
सुनो,
बहुत हिम्मत है मुझमें मैं अकेला नहीं हूं...

