कुछ बोलूं तो इतराते बहुत हो,
जानेमन तुम मुस्कुराते बहुत हो,
मन करता है तुम्हे दावत पर बुलाऊँ,
लेकिन जानेमन तुम खाते बहुत हो।
Enjoy Every Movement of life!
कुछ बोलूं तो इतराते बहुत हो,
जानेमन तुम मुस्कुराते बहुत हो,
मन करता है तुम्हे दावत पर बुलाऊँ,
लेकिन जानेमन तुम खाते बहुत हो।
खूबसूरत तो हर लम्हा है,
शायद देखने की नज़ाकत नहीं है...
अकेले चलने की हिम्मत तो है,
शायद साथ छोड़ने की आदत नहीं है...
शर्त है मै सिर्फ मयखाने तक जाऊंगा
आगे का रास्ता तुम तय कर लेना...
ताल्लुक़ मेरा पुराना है इन गलियों से,
शायद छूटा पैमाना पकड़ने की आदत नहीं है...
