Je oh puchh lawe mainu
kis gal da gam hai
taan kis gal da gam hai mainu
je oh eh puchh lawe
ਜੇ ਉਹ ਪੁੱਛ ਲਵੇ ਮੈਨੂੰ
ਕਿਸ ਗੱਲ ਦਾ ਗਮ ਹੈ
ਤਾਂ ਕਿਸ ਗੱਲ ਦਾ ਗਮ ਮੈਨੂੰ
ਜੇ ਉਹ ਇਹ ਪੁੱਛ ਲਵੇ
Je oh puchh lawe mainu
kis gal da gam hai
taan kis gal da gam hai mainu
je oh eh puchh lawe
ਜੇ ਉਹ ਪੁੱਛ ਲਵੇ ਮੈਨੂੰ
ਕਿਸ ਗੱਲ ਦਾ ਗਮ ਹੈ
ਤਾਂ ਕਿਸ ਗੱਲ ਦਾ ਗਮ ਮੈਨੂੰ
ਜੇ ਉਹ ਇਹ ਪੁੱਛ ਲਵੇ
Zindagi de pal hun kujh aise nikle
ke likh gaye meri pyar kahani
jina marzi me bhulna chawa hun
bhuldi ni oh marjani
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਪਲ ਕੁਝ ਐਸੇ ਨਿਕਲੇ
ਕਿ ਲਿਖ ਗਏ ਮੇਰੀ ਪਿਆਰ ਕਹਾਣੀ
ਜਿੰਨ੍ਹਾ ਮਰਜ਼ੀ ਮੈਂ ਭੁਲਣਾ ਚਾਵਾਂ ਹੁਣ
ਭੁਲਦੀ ਨਾ ਉਹ ਮਰਜਾਣੀ
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I