Jhutha hi sahi tasli na diya hota,
Gar Ishq nahi tha hamse toh kabul bhi na kiya hota.
झूठा ही सही तसली ना दिया होता,
गर इश्क़ नही था हमसे तो कबूल भी ना किया होता|
Jhutha hi sahi tasli na diya hota,
Gar Ishq nahi tha hamse toh kabul bhi na kiya hota.
झूठा ही सही तसली ना दिया होता,
गर इश्क़ नही था हमसे तो कबूल भी ना किया होता|
Friendship is a temple of fire,
Its essence is gold hidden in the sand.
When it burns in the sun,
You will find its splendour.
जिंदगी तुझे जीने की साझीश जारी है
हर लम्हे मे दर्द है और दर्द से अपनी यारी है
कुछ न देके भी भोत कुछ दिया है तूने
एसिलिए तू कही न कही हमको प्यारी है ।
नुकसान भरा नहीं पिछली बरबादी का
फिर एक दफा तुझे सवारने की तयारी है
जिंदगी तुझे ज़ीने की साझीश जारी है ।
हर दिन आके झँझोड़ जाती है तू
जैसे सदियों से तेरी हमपे उधारी है
तू साथ दे या न दे हमारा
लेकिन तुजे जीने की ज़िद्द दिल मे उतारी है
जिंदगी तुझे जीने की साझीश जारी है ।
वक्त का खामोशी से गुजारना ओर धडकनों का यूं शोर मचाना
एह जिंदगी तू ही बता ये कैसी बेकरारी है
लौट आए जो वो पुराने लोग
तो पुछू आखिरी कैसे उन्होने उन्होने जिंदगी गुजारी है
जिंदगी तुझे जीने की साझीश जारी है ।
उम्मीद है तू साथ चलेगी मेरे
खवाबों से भरी हाथ मे मेरे पिटारी है
पूरे हो या न हो ये किस्मत का खेल है
पर जिंदगी तुझे जीने की जंग जारी है ।
……….. अजय कुमार ।