तख्त ओ ताज ने तुम्हे गुनहगार किया
आओ मेरे पास दिल के खयाल रख दो,
हश्र बुरा है तुम्हारी रगो के धागों का,
लाओ यहां बेगुनाही का मंजर रख दो...
किसी का पता लेकर निकले हो शायद,
छोड़ो उसकी शक्ल उसे यहां रख दो,
लोग कहते हैं बहुत उम्दा क़ातिल हो तुम
लाओ यहां वो झूठा खंजर भी रख दो...
हालातों से टकराकर हमने, खुद को मजबूत बनाया है..
तभी तो हर दर्द से लड़ने का, हुनर हम में आया है..
पहले डरा करते थे दर्द से हम, अब दर्द को हमने डराया है..
पहले रहता था, ताव में वो, अब जाकर घुटनों पे आया है..
अब नहीं सताता वो हमको, हमने खुदको इतना सताया है..
हम पत्थर बनकर बैठे गए, पत्थरों से कौन लड पाया है….