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Title: true-love-punjabi-shayari-status

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


जो कहते हैं रंगत माईने नही रखती || hindi poetry || best lines

जो कहते हैं रंगत माईने नही रखती
उन्हें ही अपने हुसन पे इतराते देखा है🥀

नहीं रही अब कीमत यहाँ लहज़े की
सोच समझ को ख़ाक में जाते देखा है🥀

नहीं है हिम्मत अब नए रिश्ते बनाने की
कई शख्सों को साथ छोड़ जाते देखा है🥀

पैरों के छाले भी थक गए दे दे कर दर्द ‘शरद’
हिम्मत देख मेरी उन्हें भी मुस्कुराते देखा है🥀

अच्छी निगाह की बात करते हैं जो लोग
उनकी नियत को हुसन देख डगमगाते देखा है🥀

मेरा अपना होने का दावा करते हैं जो
उन्हें ही मेरी कामयाबी पर खार खाते देखा है🥀

ओ मेरे दिलबर मेरे दिलकश मेरे दिलजू
तेरे साथ गुज़रा रास्ता जन्नत को जाते देखा है🥀

जब देखा था तेरी आंखों मै मैंने
खुदको सांस लेना तक भूल जाते देखा है🥀

कहते हैं प्यार ताकत है सबसे बड़ी इस दुनिया की
दौलत पे कई सच्चे प्यारों को लड़खड़ाते देखा है🥀

Title: जो कहते हैं रंगत माईने नही रखती || hindi poetry || best lines


Love poetry || Hindi Poems on mohobbat

देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,
अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,
यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर,
यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने।

कायदा इश्क जब से पड़ा है,
इल्म बस इतना बचा है मुझ में,
फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं।

आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए,
मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए।
वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं,
लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए।

मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया,
ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया।
वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो,
कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया।

चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी,
पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी।
तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है,
पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी।

प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ,
कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की।
एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा,
अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की।

यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं,
हसरतें बहुत थी हमें भी दुनिया बसाने की।
मुझे आज भी तुमसे कोई गिला नहीं है,
दस्तूर ही कहां बचा है मोहब्बत निभाने का।

इस शहर में मुर्दों की तादाद बहुत है,
कौन कहता है कि ये आबाद बहुत है,
जुल्मों के खिलाफ यहां कोई नहीं बोलता,
बाद में करते सभी बात बहुत हैं।

मेरे छोटे से इस दिल में जज्बात बहुत हैं,
नींद नहीं है आंखों में ख्वाबों की बरसात बहुत है।
राह नहीं, मंजिल नहीं, पैर नहीं कुछ भी नहीं,
मुझे चलने के लिए तेरा साथ बहुत है।

दूर होकर भी तू मेरे पास बहुत है,
सगा तो नहीं मेरी पर तू खास बहुत है।
जिनकी टूट चुकी उनको छोड़ो बस,
हमें तो आज भी उनसे आस बहुत है।

Title: Love poetry || Hindi Poems on mohobbat