Kive keh deya ke thakk gya haan mein
Pta nhi kinniya jimmewariyan judiyan ne mere naal..
ਕਿਵੇਂ ਕਹਿ ਦਿਆਂ ਕਿ ਥੱਕ ਗਿਆ ਹਾਂ ਮੈਂ,
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਕਿੰਨੀਆਂ ਜਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਜੁੜੀਆਂ ਨੇ ਮੇਰੇ ਨਾਲ..
Kive keh deya ke thakk gya haan mein
Pta nhi kinniya jimmewariyan judiyan ne mere naal..
ਕਿਵੇਂ ਕਹਿ ਦਿਆਂ ਕਿ ਥੱਕ ਗਿਆ ਹਾਂ ਮੈਂ,
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਕਿੰਨੀਆਂ ਜਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਜੁੜੀਆਂ ਨੇ ਮੇਰੇ ਨਾਲ..
Kitho liyawa alfaz oh labb ke
Bayan kar sakan Jo mohobbat meri nu..!!
ਕਿੱਥੋਂ ਲਿਆਵਾਂ ਅਲਫਾਜ਼ ਉਹ ਲੱਭ ਕੇ
ਬਿਆਨ ਕਰ ਸਕਣ ਜੋ ਮੋਹੁੱਬਤ ਮੇਰੀ ਨੂੰ..!!
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी