Skip to content

Jinde meriye || true love Punjabi shayari || Punjabi status

Kon pasand Karu kise layi enna rona jinde meriye
Tenu mere jinna kise nahio chahuna jinde meriye..!!

ਕੌਣ ਪਸੰਦ ਕਰੂ ਕਿਸੇ ਲਈ ਇੰਨਾ ਰੋਣਾ ਜਿੰਦੇ ਮੇਰੀਏ..!!
ਤੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਜਿੰਨਾ ਕਿਸੇ ਨਹੀਂਓ ਚਾਹੁਣਾ ਜਿੰਦੇ ਮੇਰੀਏ..!!

Title: Jinde meriye || true love Punjabi shayari || Punjabi status

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


aulaad velli

Jiss baap dii aulaad hovveh velli,

Uss baap nu odde toh kii Umeed hoyegi,

Jiss baap di jawani rull gyii hovveh kamandeh Kamandeh,

Uss baap nu oddi zindagi deh saffar di kinni fikkar hoyegi.

Jo herpal socha vich rehnda hovveh,

Jiss neh apne saareh supne maareh hovveh.

Apni aulaad nu kaamjaab bnaouon leyi,

Uss baap nu kinni fikkar hoyegi,

Her baap nu ek aas hundi jo ekk aulaad toh la betha hunda,

Ekk baap jo apni kmaayi di mehnat da fall ekk apni aulaad toh laa betha hunda.

Baap kadde haar da ni onnu oddi aas hee harra bethdi hai,

Ooh kadde jhukkda nai per hmm jddoh halaat hee kharaab hon te onnu oddi aulaad hee jhukka dendi hai.

Title: aulaad velli


Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry

थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।

Title: Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry