Tumhare saath bitaye pal kabhi bhul nahi paunga,
Jindgi ke raho per chalna bhi tumne sikhaya,
kya pata konse mod pe aa khada hu,
par tumhare liye kabhi me khud ko rok na paya.
Tumhare saath bitaye pal kabhi bhul nahi paunga,
Jindgi ke raho per chalna bhi tumne sikhaya,
kya pata konse mod pe aa khada hu,
par tumhare liye kabhi me khud ko rok na paya.
Chal hun bhul ja puraani
gallan karn da ki faiyda
dukha ton begair kujh milna ni
te fer ohna nu yaad karn da ki faiyda
ਚਲ ਹੁਣ ਭੁਲ ਜਾ ਪੁਰਾਣੀ
ਗਲਾਂ ਕਰਣ ਦਾ ਕੀ ਫਾਇਦਾ
ਦੁਖਾਂ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਕੁੱਝ ਮਿਲਣਾ ਨੀ
ਤਾਂ ਫੇਰ ਓਹਣਾ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਣ ਦਾ ਕੀ ਫਾਇਦਾ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
राजनीति की दुनिया में खेल बहुत है,
कोई जीता है, कोई हारा है।
सत्ता की भूख और वाद-विवाद,
मन में जलती चिंगारी है।
राजनेताओं की रंगीन छलावा,
जनता को वहमों में बँधाता है।
कुछ वादे खाली और कुछ झूले धूले,
आम आदमी को खोखला बनाता है।
वाद-विवाद के आगे सच्चाई छिपती,
लोकतंत्र की मूल्यों पर भारी है।
शोर और तामझाम में खो गई है,
सम्मान, सद्भाव और आदर्शि है।
नीतिबद्धता और समर्पण की कमी,
राजनीति को कर रही है मिट्टी।
सच्ची सेवा की बजाए प्रतिष्ठा,
हौसले को तोड़ रही है मिट्टी।
चाहे जितना बदले युगों का सफ़र,
राजनीति का रंग हर बार वही।
प्रशासनिक शक्ति की लालसा में,
जनता भूल जाती है खुद को वही।