मिलेगी परिंदों को मंजिल यकीनन
यह उनके फैले हुए पर बोलते है
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं
जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं
Enjoy Every Movement of life!
मिलेगी परिंदों को मंजिल यकीनन
यह उनके फैले हुए पर बोलते है
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं
जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं
थक गए हैं मंजिल को मंजिल करते करते,
रास्तों के सारे रास्ते भी बंद हैं...
आगे बढ़ाया है एक कदम डरते डरते,
कदमों से रास्ते भी तो तंग हैं...
मसलन आगे न रुक जाऊं चलते चलते,
सुना है रास्तों में बहुत तंज है...
चलो वापस घर चले सांस भरते भरते,
याद आया,
रास्तों के सारे रास्ते भी बंद है...
