जीवन के दरिया में
एक कश्ती सा है मन
कहती हैं…
हालात की लहरें,
कि सफ़र में अभी
आज़माइश बाक़ी है!
समझाना मन को और
समझना उसे…
कि साथ है जब तक ये
हर गुंजाईश बाक़ी है।
जीवन के दरिया में
एक कश्ती सा है मन
कहती हैं…
हालात की लहरें,
कि सफ़र में अभी
आज़माइश बाक़ी है!
समझाना मन को और
समझना उसे…
कि साथ है जब तक ये
हर गुंजाईश बाक़ी है।

Rabba mainu maar mukaade
Aag la saarde
maithon doori nahi jhali jandi
mainu shamshaan vich swah bna de
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”