ਜੋ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਚ ਬੰਦੇ ਖਾਸ ਕੁਭੇ,
ਸੱਚ ਪੁਸ਼ੇ ਤਾ ਓਹਨਾ ਦੇ ਦਿਲ ਵਿਚ ਖ਼ਾਰ ਬੜੇ🥀🙂
Jo Zindagi Ch Banda Khaas Kudaa,
Sach Pucha Ta Ohna De Dil Vich Khaar Badaa🥀🙂
-Karan Bhardwaj✍️🥀
ਜੋ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਚ ਬੰਦੇ ਖਾਸ ਕੁਭੇ,
ਸੱਚ ਪੁਸ਼ੇ ਤਾ ਓਹਨਾ ਦੇ ਦਿਲ ਵਿਚ ਖ਼ਾਰ ਬੜੇ🥀🙂
Jo Zindagi Ch Banda Khaas Kudaa,
Sach Pucha Ta Ohna De Dil Vich Khaar Badaa🥀🙂
peer e bhawe fakeer e
kise ne na badalni taqdeer e
e khuda shuru tu kita khatam tu kita
fir kyu dikhaunde hath di lakeer e
ਪੀਰ ਏ ਭਵੇ ਫਕੀਰ ਏ,
ਕਿਸੇ ਨੇ ਨਾ ਬਦਲਨੀ ਤਕਦੀਰ ਏ।
ਏ ਖੁਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਤੂੰ ਕੀਤਾ-ਖਤਮ ਤੂੰ ਕੀਤਾ,
ਫਿਰ ਕਿਉ ਦਿਖਾਉਂਦੇ ਹੱਥ ਦੀ ਲਕੀਰ ਏ
..ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਔਲਖ
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।