ਜੋ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਚ ਬੰਦੇ ਖਾਸ ਕੁਭੇ,
ਸੱਚ ਪੁਸ਼ੇ ਤਾ ਓਹਨਾ ਦੇ ਦਿਲ ਵਿਚ ਖ਼ਾਰ ਬੜੇ🥀🙂
Jo Zindagi Ch Banda Khaas Kudaa,
Sach Pucha Ta Ohna De Dil Vich Khaar Badaa🥀🙂
-Karan Bhardwaj✍️🥀
ਜੋ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਚ ਬੰਦੇ ਖਾਸ ਕੁਭੇ,
ਸੱਚ ਪੁਸ਼ੇ ਤਾ ਓਹਨਾ ਦੇ ਦਿਲ ਵਿਚ ਖ਼ਾਰ ਬੜੇ🥀🙂
Jo Zindagi Ch Banda Khaas Kudaa,
Sach Pucha Ta Ohna De Dil Vich Khaar Badaa🥀🙂
रोशनी भरी थी राहें मेरी, जाने कब अंधेरी हो गई..
मंजिल की तलाश में राहों से यारी, और भी गहरी हो गई..
जिन मंजिलों से लेना-देना ना था, वो बदली और मेरी हो गई..
गैर मंजिलों को इतना वक्त दिया के, खुद मंजिल मेरी खो गई..
खैर कोशिशों में कोई कमी ना थी, जो नाकाम मेरी हो गई..
मेरी मंजिल की तलाश अब भी जारी है, भले क्यूं ना देरी हो गई..
भले क्यूं ना देरी हो गई..
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।