Kali raat aajh
na laattuaan di chamak na diviaan di loo
chhayiaa matam
jiven raunak da putar liya hove kise kho
Kali raat aajh
na laattuaan di chamak na diviaan di loo
chhayiaa matam
jiven raunak da putar liya hove kise kho
Ohne hnjhu hi dene ne ohde larh laggeyan nu
Mohobbat apni da khaure dastooor bnaya e..!!
Galti usdi howe ja meri saza menu hi milegi
Ishq apne da ohne esa asool bnaya e..!!
ਉਹਨੇ ਹੰਝੂ ਹੀ ਦੇਣੇ ਨੇ ਲੜ ਲੱਗਿਆਂ ਨੂੰ
ਮੋਹੁੱਬਤ ਆਪਣੀ ਦਾ ਖੌਰੇ ਦਸਤੂਰ ਬਣਾਇਆ ਏ..!!
ਗ਼ਲਤੀ ਉਸਦੀ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਮੇਰੀ ਸਜ਼ਾ ਮੈਨੂੰ ਹੀ ਮਿਲੇਗੀ
ਇਸ਼ਕ ਆਪਣੇ ਦਾ ਉਹਨੇ ਐਸਾ ਅਸੂਲ ਬਣਾਇਆ ਏ..!!
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…