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Kalyug di gal || life shayari

ਰੱਖਣਾ ਨ੍ਹੀ ਜ਼ਮੀਰ
ਪਰ ਸੱਭ ਹੋਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਅਮੀਰ
ਜਿਹੜਾ ਅੱਜ ਤੂੰ ਬੀਜ ਲਾਉਣਾ
ਉਸੇ ਦਾ ਸਵਾਦ ਚੱਖਕੇ ਸਵਰਗਾਂ ਨੂੰ ਜਾਣਾ
ਕੋਈ ਰਹਿਣਾ ਨੀ ਹਿਸਾਬ ਉਧਾਰੀ
ਜਿੱਥੇ ਤੂੰ ਨਿੱਤ ਚਲਾਕੀ ਵਰਤੀ
ਉਹਨੇ ਪੱਕੀ ਹੀ ਡਾਇਰੀ ਤੇਰੇ ਖਾਤੇ ਦੀ ਲਾਤੀ
ਹੱਥਾਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਇਹੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਕੌੜਾ ਸੱਚ
ਆਖਿਰ ਤੇ ਵੀ ਲੱਗਣੇ ਚਾਰ ਹੱਥ
ਇੱਥੇ ਚੜਦੇ ਤੋਂ ਮੱਚਣਾ ਰਿਵਾਜ਼ ਬਣ ਗਿਆ
ਹੋਰ ਨੀ ਤਾਂ ਮਹਿਫ਼ਲ ਤੋਂ ਕਤਲ਼ ਹੁੰਦਾ ਵੇਖਿਆ
ਬੜੀ ਅਜੀਬ ਹੈ ਦੁਨੀਆ
ਕੋਈ ਰੋਟੀ ਖਾਤਰ ਰੋਂਦਾ ਤੇ ਕੋਈ ਪੈਸੇ ਨੂੰ ਏ ਰੋਂਦਾ
ਨੀ ਹਾਲੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸਮਾਂ ਏ
ਕਾਸਤੋ ਮੈਂ ਬਦਲੇ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਰੱਖਣੀ
ਮੇਰਾ ਰੱਬ ਅਦੀਬ ਜਿੱਥੇ ਰੱਖੂ ਰਹਿਲਾਗੇ
ਮਸ਼ਹੂਰਮਰੂਫ਼ ਬਣਕੇ ਕਿ ਲੈਣਾ ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਚਾਰ ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਖਿਡਾਰੀ

✍️ ਖੱਤਰੀ

Title: Kalyug di gal || life shayari

Tags:

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Dard || two line hindi shayari

Jinke paas zindagi mein dene ke liye mohobbat ke siwa kuch nahi hota hai
Unhe zindagi mein dard ke siwa kuch nahi milta hai💔

जिनके पास जिंदगी में देने के लिये मोहब्बत के सिवा कुछ नही होता है,
उन्हें जिंदगी में दर्द के सिवा कुछ नही मिलता है💔

Title: Dard || two line hindi shayari


ऊंट की गर्दन || birbal and akbar story hindi

बीरबल की सूझबूझ और हाजिर जवाबी से बादशाह अकबर बहुत रहते थे। बीरबल किसी भी समस्या का हल चुटकियों में निकाल देते थे। एक दिन बीरबल की चतुराई से खुश होकर बादशाह अकबर ने उन्हें इनाम देने की घोषणा कर दी।

काफी समय बीत गया और बादशाह इस घोषणा के बारे में भूल गए। उधर बीरबल इनाम के इंतजार में कब से बैठे थे। बीरबल इस उलझन में थे कि वो बादशाह अकबर को इनाम की बात कैसे याद दिलाएं।

एक शाम बादशाह अकबर यमुना नदी के किनारे सैर का आनंद उठा रहे थे कि उन्हें वहां एक ऊंट घूमता हुआ दिखाई दिया। ऊंट की गर्दन देख राजा ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि ऊंट की गर्दन मुड़ी हुई क्यों होती है?”

बादशाह अकबर का सवाल सुनते ही बीरबल को उन्हें इनाम की बात याद दिलाने का मौका मिल गया। बीरबल से झट से उत्तर दिया, “महाराज, दरअसल यह ऊंट किसी से किया हुआ अपना वादा भूल गया था, तब से इसकी गर्दन ऐसी ही है। बीरबल ने आगे कहा, “लोगों का यह मानना है कि जो भी व्यक्ति अपना किया हुआ वादा भूल जाता है, उसकी गर्दन इसी तरह मुड़ जाती है।”

बीरबल की बात सुनकर बादशाह हैरान हो गए और उन्हें बीरबल से किया हुआ अपना वादा याद आ गया। उन्होंने बीरबल से जल्दी महल चलने को कहा। महल पहुंचते ही बादशाह अकबर ने बीरबल को इनाम दिया और उससे पूछा, “मेरी गर्दन ऊंट की तरह तो नहीं हो जाएगी न?” बीरबल ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “नहीं महाराज।” यह सुनकर बादशाह और बीरबल दोनों ठहाके लगाकर हंस दिए।

इस तरह बीरबल ने बादशाह अकबर को नाराज किए बगैर उन्हें अपना किया हुआ वादा याद दिलाया और अपना इनाम लिया।

Title: ऊंट की गर्दन || birbal and akbar story hindi