YAAR TERE KALAM ME KUCH TO KAMAL HAI….
TU JO BHI KALLAM (ARAZ/SPEAK)KARTA HAI KAMAL KARTA HAI
YAAR TERE KALAM ME KUCH TO KAMAL HAI….
TU JO BHI KALLAM (ARAZ/SPEAK)KARTA HAI KAMAL KARTA HAI
Na khusi koi na dard rulaun wala
me apna liya har rang is duniya da mainu jo ajmaun wala
ਨਾ ਖੁਸ਼ੀ ਆ ਕੋਈ, ਨਾ ਦਰਦ ਰੁਲਾਉਣ ਵਾਲਾ
ਮੈਂ ਅਪਣਾ ਲਿਆ ਹਰ ਰੰਗ ਇਸ ਦੁਨੀਆ ਦਾ
ਮੈਨੂੰ ਜੋ ਅਜਮਾਉਣ ਵਾਲਾ
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं