YAAR TERE KALAM ME KUCH TO KAMAL HAI….
TU JO BHI KALLAM (ARAZ/SPEAK)KARTA HAI KAMAL KARTA HAI
YAAR TERE KALAM ME KUCH TO KAMAL HAI….
TU JO BHI KALLAM (ARAZ/SPEAK)KARTA HAI KAMAL KARTA HAI
तू क्यूं उसे इस क़दर तांक रहा है,
हां वही फकीर, जो वहां नाच रहा है…
मुस्कुरा रहा है तू उसकी फटी कमीज़ देखकर,
देख, वो भी हंस रहा है तेरी तमीज़ देखकर…
सोच मत, के उसकी किस्मत तुझसे हारी है,
उसकी खाली जेब तेरे पैसों से ज्यादा भारी है…
वो तो हर घर दुआएं बांटता है,
जैसे हर दर खुदाए बांटता है…
मखमल का बिछौना तुझे रास नहीं आता,
देख, वो घास में सोने से बाज़ नहीं आता…
छुपाता है तू असलियत झूठी मुस्कान के पीछे,
कितना सुकून है उसकी हर मुस्कान के पीछे…
Seher mai andhera hai…
Mera ghar toh roshan hai magar…
Yeh waqt nahi kuch khas hai…
Par khush hun tu jo mere paas hai..🥰
शहर में अंधेरा है
मेरा घर तो रोशन है मगर
ये वक़्त नही कुछ खास है
पर खुश हूं तू जो मेरे पास है..🥰