Kat rahi hai zindagi kuch ese
Titli ka jism jaise daba ho kitab mein… 💔💯
कट रही है ज़िन्दगी कुछ ऐसे…
तितली का जिस्म जैसे दबा हो किताब में….💔💯
Enjoy Every Movement of life!
Kat rahi hai zindagi kuch ese
Titli ka jism jaise daba ho kitab mein… 💔💯
कट रही है ज़िन्दगी कुछ ऐसे…
तितली का जिस्म जैसे दबा हो किताब में….💔💯
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
raat kyu tu udaas hai
kush pal thehar fir subaah ki aas hai
रात क्यों तू उदास है
कुछ पल ठहर फिर सुबह की आस है