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Kaun haa me || ਕੌਣ ਹਾਂ ਮੈਂ || Punjabi kavita

ਆਮ ਜਾ ਇਕ ਇਨਸਾਨ
ਝੂਠ ਵਿਚ ਵੀ ਸੱਚ ਜਿਸਦੇ
ਆਖਦੇ ਗੁਸਾਖੋਰ ਜਿਹਨੂੰ
ਪਰ ਸਮਝੇ ਨਾ ਕੋਈ ਉਹਨੂੰ
ਸਭ ਕੁੱਝ ਹੋਣ ਤੇ ਵੀ ਕੁਝ ਨੀ ਜਿਦੇ ਤੋ
ਉਹ ਹਾਂ ਮੈਂ
ਮਿਲ ਕੇ ਵੀ ਜਿਸਨੂੰ ਕੁੱਝ ਨਾ ਮਿਲ ਸਕਿਆ
ਉਹ ਹਾਂ ਮੈਂ
ਡਰ ਲੱਗਦਾ ਸੀ ਜਿਸਨੂੰ ਇਕੱਲੇ ਰਹਿਣ ਤੋ
ਹੁਣ ਡਰ ਲਗਦਾ ਉਹਨਾ ਤੋ ਜੋ ਨਾਲ ਨੇ ਮੇਰੇ
ਸਭ ਪਾਸੇ ਮਤਲਬੀ ਯਾਰ ਕੋਈ ਨਾ ਲੱਭਿਆ ਆਪਣਾ
ਨਾ ਮਿਲਿਆ ਕੋਈ ਕਰਨ ਨੂੰ ਦੁੱਖ ਸਾਂਝਾ
ਜਿਸ ਤੇ ਕੀਤਾ ਐਤਬਾਰ ਉਸਨੇ ਕਦੀ ਸਮਝਿਆ ਨਾ ਆਪਣਾ
ਲੋਕ ਮੇਰੀ ਚੁੱਪ ਨੂੰ ਸਮਝਦੇ ਆਕੜ
ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਬਲੋਣਾ ਸ਼ੱਡਤਾ ਕਿਉਕਿ
ਜਿਹੜਾ ਨਾ ਸਮਝਿਆ ਚੁੱਪ ਉਹ ਬੋਲ ਕੀ ਸਮਝੂ
ਕਿਸੇ ਸਾਹਮਣੇ ਸ਼ੋ ਕਰਨਾ ਪਸੰਦ ਨੀ ਕੁਝ
ਬਸ ਮੇਰੇ ਆਪਣੇ ਹੀ ਸਮਝ ਜਾਣ ਇਹੀ ਬੁਹਤ ਆ

G😎

Title: Kaun haa me || ਕੌਣ ਹਾਂ ਮੈਂ || Punjabi kavita

Tags:

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry

थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।

Title: Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry


Beparwah ho izzatan nu || true line shayari || best Punjabi status

Beparwah ho izzatan nu
Kise khunje na la lawi🙌..!!
Niwe ho ho dekhi kite
Kadran na gawa lawi🙏..!!

ਬੇਪਰਵਾਹ ਹੋ ਇੱਜ਼ਤਾਂ ਨੂੰ
ਕਿਸੇ ਖੂੰਜੇ ਨਾ ਲਾ ਲਵੀਂ🙌..!!
ਨੀਵੇਂ ਹੋ ਹੋ ਦੇਖੀਂ ਕਿਤੇ
ਕਦਰਾਂ ਨਾ ਗਵਾ ਲਵੀਂ🙏..!!

Title: Beparwah ho izzatan nu || true line shayari || best Punjabi status