Jazbat nahi bayan hai humara
Alfaaz nahi arzoo hai humari
Chaahat ki wajah diwanagi nahi
Ehsaas ki bina ashiqi nahi
Lihaaz rakhna iss dil ka
Kyunki mohobaat ke bina woh mukamal hi nahi
Jazbat nahi bayan hai humara
Alfaaz nahi arzoo hai humari
Chaahat ki wajah diwanagi nahi
Ehsaas ki bina ashiqi nahi
Lihaaz rakhna iss dil ka
Kyunki mohobaat ke bina woh mukamal hi nahi
अभी मुश्किल है, कैसे बताऊ के दिल में क्या चल रहा है..
एक अजीब से उलझन में हूँ, दिल मेरा जैसे के जल रहा है..
ना जाने परेशानी की वजह है क्या, बेचैनी बड़ी अजब सी है..
ये खुद मेरी समझ से बाहर है, कुछ तो है जो खल रहा है..
बेअसर हो रही सब दुआए मेरी
जिंदगी जाने क्या सिलसिला दिखा रही है ,
जिसके लिए मांगी खुदा से खुशिया
वो ही धीरे-धीरे दिल को जला रही है।
इंतज़ार किया घंटो उसका
क्या मालूम था वो किसी ओर से मिलके आ रही है ,
मिलने के बहाने ढूंढती थी जो बार बार
यार वो लड्की आँख मिलने से घबरा रहि रही है ।