Jazbat nahi bayan hai humara
Alfaaz nahi arzoo hai humari
Chaahat ki wajah diwanagi nahi
Ehsaas ki bina ashiqi nahi
Lihaaz rakhna iss dil ka
Kyunki mohobaat ke bina woh mukamal hi nahi
Jazbat nahi bayan hai humara
Alfaaz nahi arzoo hai humari
Chaahat ki wajah diwanagi nahi
Ehsaas ki bina ashiqi nahi
Lihaaz rakhna iss dil ka
Kyunki mohobaat ke bina woh mukamal hi nahi
Tenu pa asa payian sabe jannatan
Ji rahi hun thod koi na😇..!!
Teri deed vichon mile jhaka rabb da
Ke mandiran di lod koi na❤️..!!
ਤੈਨੂੰ ਪਾ ਅਸਾਂ ਪਾਈਆਂ ਸੱਭੇ ਜੰਨਤਾਂ
ਜੀ ਰਹੀ ਹੁਣ ਥੋੜ ਕੋਈ ਨਾ😇..!!
ਤੇਰੀ ਦੀਦ ਵਿੱਚੋਂ ਮਿਲੇ ਝਾਕਾ ਰੱਬ ਦਾ
ਕਿ ਮੰਦਿਰਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਕੋਈ ਨਾ❤️..!!
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…