कुछ ख्वाहिशें तो कुछ नुमाहिशें हैं, चेहरे पर मुस्कुराहट फिर भी आंखों में बरिशें हैं न जाने कहां रूठ कर बैठा है वक्त मुझसे क्योंकि आज भी उसको पाने की खुदा से गुजारिशें हैं।
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कुछ ख्वाहिशें तो कुछ नुमाहिशें हैं, चेहरे पर मुस्कुराहट फिर भी आंखों में बरिशें हैं न जाने कहां रूठ कर बैठा है वक्त मुझसे क्योंकि आज भी उसको पाने की खुदा से गुजारिशें हैं।
चल दिया तेरे साथ, मेरा तख्त ओ ताज छूट गया,
वो रात के इंतजार में थे, सूरज फिर ऊग गया,
दर्द देते है रास्ते भी, दिल न लगाना उनसे,
रोज़ अपना दुख पीते पीते ये गला सूख गया,
सांसे भी नम है,
प्यास बुझालो क्यू आंखो में समंदर छुपा बैठे हो,
तुम भी धड़कनों का जनाजा कांधे पर लिए बैठे हो...
