कुछ ख्वाहिशें तो कुछ नुमाहिशें हैं, चेहरे पर मुस्कुराहट फिर भी आंखों में बरिशें हैं न जाने कहां रूठ कर बैठा है वक्त मुझसे क्योंकि आज भी उसको पाने की खुदा से गुजारिशें हैं।
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कुछ ख्वाहिशें तो कुछ नुमाहिशें हैं, चेहरे पर मुस्कुराहट फिर भी आंखों में बरिशें हैं न जाने कहां रूठ कर बैठा है वक्त मुझसे क्योंकि आज भी उसको पाने की खुदा से गुजारिशें हैं।
Likhu…
Toh “lafz” tum ho …
Sochu….
Toh “khayaal” tum ho…
Maangu….
Toh “dua” tum ho…
Sach kahu..
Toh “mohobbat” tum ho…. 😘🥰🥰
लिखूँ…
तो “लफ्ज़” तुम हो…
सोचूँ…
तो “खयाल” तुम हो…
माँगू…
तो “दुआ” तुम हो…
सच कहूँ…
तो “मोहोब्बत” तुम हो…😘🥰🥰