”E jindgi mujse is trah na muh mod
mai khafa hu khud se tu is trah na mera dil tod”
”E jindgi mujse is trah na muh mod
mai khafa hu khud se tu is trah na mera dil tod”
जाते जाते एक उम्दा तालीम दे गया, वो मुसाफिर, खुदकी तलाश में घर से निकल गया, वो मुसाफिर, सोचा साथ जाऊं मैं भी, पर जाऊंगा कहां, जा चुका होगा मीलों दूर, उसे पाऊंगा कहां, इसी सोच में रात हुई, नींद का झोंका आ गया, सुबह आंखे खुली तो सोचा, क्या वो मौका आज आ गया ? के चला जाऊं सबसे इतना दूर के कुछ ना हो, गहरी नींद में बेड़ियां मिले पर सचमुच ना हो, सच हो तो बस आसमां में परिंदो सी उड़ान हो, चाहूंगा हर सितमगर का बड़ा सा मकान हो, वहां आवाज़ देकर झोली फैलाएगा वो मुसाफिर, तुम्हे देख भीगी पलकें उठाएगा वो मुसाफिर, मोहब्बत से एक रोटी खिलाकर देखना तुम, शोहरत से दामन भर जाएगा वो मुसाफिर...
Jo kadi haqeeqat nahi banne, o kuaab sajaa rahe haa
jis raah koi manzil nahi milni, ose raahi jaa rahe haa
paun di khawaahish nahi, fer v rishta nibha rahe haa
bas ik umeed sahaare din bitaa rahe hai
ਜੋ ਕਦੀ ਹਕੀਕਤ ਨਹੀ ਬਨਣੇ,ਓ ਖੁਆਬ ਸਜਾ ਰਹੇ ਹਾਂ..
ਜਿਸ ਰਾਹ ਕੋਈ ਮੰਜ਼ਿਲ ਨਹੀ ਮਿਲਣੀ,ਓਸੇ ਰਾਹੀਂ ਜਾ ਰਹੇ ਹਾਂ..
ਪਾਉਣ ਦੀ ਖਵਾਹਿਸ਼ ਨਹੀ,ਫੇਰ ਵੀ ਰਿਸ਼ਤਾ ਨਿਭਾ ਰਹੇ ਹਾਂ..
ਬਸ ਇਕ ਉਮੀਦ ਸਹਾਰੇ ਦਿਨ ਬਿਤਾ ਰਹੇ ਹਾਂ..