
Khaure khafa ne sathon ja bewafa ho gaye..!!

नींद बेचैनी से कटती रही
ख्वाब कोहरे मे छुपती रही
तेरी आवाज़ से मैं अनसुनी रही
तु मिला न कही मंज़िलों पे
मैं भटकती भटकती
तुझे ढूंढती रही
तेरा मेरा रिश्ता इन
काग़ज़ों पे खत्म हो गया
साथ तेरा मेरा युं सिमट सा गया
जैसे चार दिवारी में बंध सा गया
तेरी बातों को मैं याद करता
तेरी हँसी को मैं याद करता
हमारे उन्ही हसीन पलो को
हररोज सजाया करता
जब पहुंचा कि जब पहुंचा मैं अपनी मौत के पास
कि जब पहुंचा कि जब पहुंचा मैं अपनी मौत के पास
खुदा बोला, कि उसकी की हुई दुआओं में कमब्ख्त बहुत दम है
इसलिए मौत तो दूर की बात, तेरी ज़िंदगी में दरद बहुत कम है