नज़र में ज़ख़्म-ए-तबस्सुम छुपा छुपा के मिला,
खफा तो था वो मगर मुझ से मुस्कुरा के मिला।❤️
Enjoy Every Movement of life!
नज़र में ज़ख़्म-ए-तबस्सुम छुपा छुपा के मिला,
खफा तो था वो मगर मुझ से मुस्कुरा के मिला।❤️
Waqat badhi teji naal badal gya
par tu
waqat ton v tej nikleya
ਵਕਤ ਬੜੀ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਬਦਲ ਗਿਆ
ਪਰ ਤੂੰ
ਵਕਤ ਤੋਂ ਵੀ ਤੇਜ਼ ਨਿਕਲਿਆ
लो आज महफिल सजी हैं हमारे लिए
सुनने को मुझे तैयार हर कोई है
पर दिल ने इजाजत नहीं दी है अभी
मेरी गजलो का हकदार और कोई है