नज़र में ज़ख़्म-ए-तबस्सुम छुपा छुपा के मिला,
खफा तो था वो मगर मुझ से मुस्कुरा के मिला।❤️
नज़र में ज़ख़्म-ए-तबस्सुम छुपा छुपा के मिला,
खफा तो था वो मगर मुझ से मुस्कुरा के मिला।❤️
ज़िन्दगी सीधे साधे चलना ठीक नही
उबड़ खाबड़ पड़ाव भी जरूरी है,
तैरते तैरते बाजू थक जाएंगे
एक पल के लिए नाव भी जरूरी है,
बदलाव भी जरूरी
ये घाव भी जरूरी है,
इतनी धूप अच्छी नेही
थोड़ी छांव भी जरूरी है..!
हद-ए-शहर से निकली तो,
गांव-गांव चली..
कुछ यादें मेरे संग,
पांव-पांव चली..!
सफर जो धूप का किया तो,
तजुर्बा हुआ..
वो ज़िन्दगी ही क्या जो,
छांव-छांव चली..!!
Asi taa ohda haal v nahi puchh sakde
kite eh na keh de
tainu eh hak kihne ditaa??
ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਉਹਦਾ ਹਾਲ ਵੀ ਨਹੀਂ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ 😕
ਕਿਤੇ ਏਹ ਨਾ ਕਹਿ ਦੇ 🙄
ਤੈਨੂੰ ਇਹ ਹੱਕ ਕੀਹਨੇ ਦਿੱਤਾ????😞
@tera sagar