narazgi tumari | sad shayari
Tum naraz ho mujse..isliye..
Mein naraz Hun khud se

Enjoy Every Movement of life!
narazgi tumari | sad shayari
Tum naraz ho mujse..isliye..
Mein naraz Hun khud se


सबर की ये जिंदगी जाने केबी मुक्क्मल फल दिलाएगी
खाक हुये खवाबों पर कब नई कली आएगी ,
मसरूफ़ रहे हम सदा किताबों मे
क्या पता था जिंदगी का अशली सबक तो ठोकर शिखएगी ।
जो नोका जा रही ह दरीया के साथ
वो क्या ही वापिस किनारा दिखाएगी
अगर यू ही चलती रही खोवाबों की हकीकत से जंग
तो यकीनन जल्दी ही इंतकाल की खबर आएगी ।