narazgi tumari | sad shayari
Tum naraz ho mujse..isliye..
Mein naraz Hun khud se

Mohobbat de badle mohobbat di umeed nhi rakhde tere ton…
Bas ikk var pyar naal haal puch leya kar..!!
ਮੋਹੁੱਬਤ ਦੇ ਬਦਲੇ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦੀ ਉਮੀਦ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦੇ ਤੇਰੇ ਤੋਂ
ਬੱਸ ਇੱਕ ਵਾਰ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਹਾਲ ਪੁੱਛ ਲਿਆ ਕਰ..!!
ये किसने जेल में लाया खाना हाय अल्लाह,
मुजरिम का भी है कोई दीवाना हाय अल्लाह।
ये मज्मा भी मेरे रोने पे बजाता है ताली,
किसको सुनाएं अपना अफ़साना हाय अल्लाह।
अब क्या कि जुर्म किसने की है क़ुसुर है किसका,
अब तो लगा है मुझपर जुर्माना हाय अल्लाह।
मेरी नज़र क्या उस पे है सबकी नज़र मुझ पे है,
पूरा शहर है उसका दीवाना हाय अल्लाह।
वो मुझसे मिलता है रोज़ाना मगर नतीजा ये,
देखो तो लगता है वो बेगाना हाय अल्लाह।
जब भी किसी ने पूछा है धोखा कब मिला फिर तो,
बचपन का याद आए याराना हाय अल्लाह।
शिकवा नहीं है उससे बस दुख ‘अमीम’ इतना है,
क्यों मेरा लौट आया नज़राना हाय अल्लाह