Pane ki usko mangi mannat har dafa hai ya to meri ibaadat me kami hai ya mera khuda hi khafa hai
पाने की उसको मांगी मन्नत हर दफा है या तो मेरी ईबादत में कमी है या मेरा खुदा ही खफा है
Pane ki usko mangi mannat har dafa hai ya to meri ibaadat me kami hai ya mera khuda hi khafa hai
पाने की उसको मांगी मन्नत हर दफा है या तो मेरी ईबादत में कमी है या मेरा खुदा ही खफा है
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।