Byan nahi hota ab haal-e-dil humse
Tum samjh jao khud se to khuda ki rehmat samjhein hum..!!
बयान नहीं होता अब हाल-ए-दिल हमसे
तुम समझ जाओ खुद से तो खुदा की रहमत समझें हम..!!
Byan nahi hota ab haal-e-dil humse
Tum samjh jao khud se to khuda ki rehmat samjhein hum..!!
बयान नहीं होता अब हाल-ए-दिल हमसे
तुम समझ जाओ खुद से तो खुदा की रहमत समझें हम..!!
Vo roye to bhut par mujhse mooh mod kar roye
Koi majboori hogi jo dil tod kar roye
Mere samne kar diye…Meri tasveer ke tukde
Pta chala mere piche vo unhe jod kar roye
वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़ कर रोए,
कोई मजबूरी होगी जो दिल तोड़ कर रोए,
मेरे सामने कर दिए… मेरी तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए।
खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।