आंखों में काजल , माथे पर बिंदी , खुले बालों में जब वो सामने आती है ,
मां कसम यार कुछ पल के लिए सांसे थम जाती है ❤️
और जब पास आ कर आंखों में आंखे डाल कर पूछती है कैसी लग रही हूं……………
कुछ बोल नही पाता पर यारों जान निकल जाती है। ❤️❤️
आंखों में काजल , माथे पर बिंदी , खुले बालों में जब वो सामने आती है ,
मां कसम यार कुछ पल के लिए सांसे थम जाती है ❤️
और जब पास आ कर आंखों में आंखे डाल कर पूछती है कैसी लग रही हूं……………
कुछ बोल नही पाता पर यारों जान निकल जाती है। ❤️❤️
जिन रास्तों पे सुरु ये सफर हुआ था,
आज उन्हीपे वापिस लौट रहा हूँ।
ख्वाब जो देखे थे कल,
आज उन्हें पाके लौट रहा हूँ।
कामयाबियों के राह पे जो छुटा था,
उन्हें आज समेट ते हुए लौट रहा हूँ।
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी