

यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
Ehsas kraya ruhaniyat da
Seene te lgge fattan ne..!!
“Roop” ishqe de raahan nu ohi pchanan
jinna khadiyan dhungiya satta ne..!!
ਅਹਿਸਾਸ ਕਰਾਇਆ ਰੂਹਾਨੀਅਤ ਦਾ
ਸੀਨੇ ਤੇ ਲੱਗੇ ਫੱਟਾਂ ਨੇ..!!
“ਰੂਪ” ਇਸ਼ਕੇ ਦੇ ਰਾਹਾਂ ਨੂੰ ਓਹੀ ਪਛਾਨਣ
ਜਿੰਨਾਂ ਖਾਧੀਆਂ ਡੂੰਘੀਆਂ ਸੱਟਾਂ ਨੇ..!!