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Title: kikarda

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Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Life Poem: गमों में भी मुस्कुराना सीखिये

परवाह नहीं चाहें कहता रहें कोई भी हमें पागल दिवाना
हम क्यू बताए किसी कों के हम ज़ानते हैं गमो में भी मुस्कराना
 
ज़ान तक अपनीं लुटानी पड़ती हैं इश्क़ मे
ऐसें हीं नहीं लिख़ा ज़ाता मोहब्बत का अफ़साना
 
क़िसी लाश के पास खडी होती हैं सांस लेती लाशे
मुर्दां कौंन हैं,समझ़ ज़ाओ तो मुझ़े भी समझ़ाना
 
टाल मटोंल चल ज़ाती हैं अपने ज़रूरी कामो मे
पर मौंत सुनतीं नहीं किसी का कोईं भी ब़हाना
 
नूर ना हों ज़ाए एक़ एक़ बून्द अश्क की तो क़हना
कभीं मां बाप की ख़ातिर चन्द आंसू तो ब़रसाना
 
ज़ब किस्मत साथ नहीं देती दिल सें आदमी क़ा
तो मुश्कि़ल हो ज़ाता हैं दो वक्त क़ी रोटी भीं कमाना
 
जिन्दगीं मे बहुत ज्यादा ज़रूरी हैं ये सीख़ना
क्या क्या राज़ हैं हमे,अपनी रूह मे छिपाना
 
कितनें हम गलत हैं और क़ितने हैं हम सहीं
सुन लेना कभीं चुपकें से,बाते क़रता है ख़ुलेआम ये ज़माना
 
हर गलती माफ क़र देता हैं ऊपरवाला दयालु भगवान्
पर गलतीं से भी कभीं ना तुम क़िसी गरीब को रुलाना
 
गए वक्त नहीं हैं हम ज़ो लौट क़र ना आ सके

वक्तें-ज़रूरत ए दोस्त कभीं तुम नीरज़ को आज़माना

Title: Life Poem: गमों में भी मुस्कुराना सीखिये


माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry

पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.

आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

खामोशी मेरी जुबान को  सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने  भर दिया.

अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.

वह रात  छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.

ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.

पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.

लगता था तू आएगी बहुत  डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.

चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.

जाना चाहती हूं  उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.

जब तेरे बिना लोरियों  कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

Title: माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry