Na yaad rahi na nafrat na koi ehsas
ki me kise v salook de kabil na reha ?
ਨਾ ਯਾਦ ਰਹੀ ਨਾ ਨਫਰਤ ਨਾ ਕੋਈ ਅਹਿਸਾਸ
ਕੀ ਮੈਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਲੂਕ ਦੇ ਕਾਬਿਲ ਨਾ ਰਿਹਾ ?
Na yaad rahi na nafrat na koi ehsas
ki me kise v salook de kabil na reha ?
ਨਾ ਯਾਦ ਰਹੀ ਨਾ ਨਫਰਤ ਨਾ ਕੋਈ ਅਹਿਸਾਸ
ਕੀ ਮੈਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਲੂਕ ਦੇ ਕਾਬਿਲ ਨਾ ਰਿਹਾ ?
राजनीति की दुनिया में खेल बहुत है,
कोई जीता है, कोई हारा है।
सत्ता की भूख और वाद-विवाद,
मन में जलती चिंगारी है।
राजनेताओं की रंगीन छलावा,
जनता को वहमों में बँधाता है।
कुछ वादे खाली और कुछ झूले धूले,
आम आदमी को खोखला बनाता है।
वाद-विवाद के आगे सच्चाई छिपती,
लोकतंत्र की मूल्यों पर भारी है।
शोर और तामझाम में खो गई है,
सम्मान, सद्भाव और आदर्शि है।
नीतिबद्धता और समर्पण की कमी,
राजनीति को कर रही है मिट्टी।
सच्ची सेवा की बजाए प्रतिष्ठा,
हौसले को तोड़ रही है मिट्टी।
चाहे जितना बदले युगों का सफ़र,
राजनीति का रंग हर बार वही।
प्रशासनिक शक्ति की लालसा में,
जनता भूल जाती है खुद को वही।
ikalle rehna sikh gaye
hun mehflaa vich rehna da ji ni karda
je sun lainde kujh yaara diyaa gallan
taa dukh dil ainaa shayed nahi jarda
ਕਲੇ ਰਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਗਏ
ਹੁਣ ਮਹਿਫਲਾਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਦਾ ਜੀ ਨੀ ਕਰਦਾ
ਜੇ ਸੁਣ ਲੇਂਦੇ ਕੁਝ ਯਾਰਾਂ ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ
ਤਾਂ ਦੁਖ ਦਿਲ ਏਣਾ ਸ਼ਇਦ ਨਹੀਂ ਜਰਦਾ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷