“Tujhe Chahkar ab kisi aur ki na chahat , Ki tujhe chahkar ab kisi aur ki na chahat, Tujhe dekh na lu jab tak milti nahi is dil ko rahat”.
“Tujhe Chahkar ab kisi aur ki na chahat , Ki tujhe chahkar ab kisi aur ki na chahat, Tujhe dekh na lu jab tak milti nahi is dil ko rahat”.
खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।
Taqdeer ne jese chaha vese dhal gye hum
Bahut sambhal k chale fir bhi fisal gye hum
Kisi ne viswas toda toh kabhi kisi ne dil,
Aur logon ko lagta hain ki badal gaye hum💔
तकदीर ने जैसा चाहा वैसे ढल गए हम
बहुत सम्भल कर चले फिर भी फिसल गए हम
किसी ने विशवास तोड़ा तो कभी किसी ने दिल
और लोगों को लगता है कि बदल गए हम 💔