काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
माँ की ममता ईश्वर का वरदान है
सच पूछो तो माँ, इन्सान नहीं भगवान है
माँ के चरणों में जन्नत का हर रूप होता है
माँ में हीं ईश्वर का हर स्वरूप होता है
माँ, जो हर बच्चे के दिल की चाह होती है
मुसीबत में एक नई राह होती है
जो हर किसी के करीब नहीं होती
जो हर किसी को नसीब नहीं होती
माँ की एहमियत उनसे पूछो जिनकी माँ नहीं होती है
जो हर बच्चे की जान होती है
जो हर रिश्ते का मान होती है
सभी का एक मात्र अरमान होती है
हर किसी को माँ की ममता मिले, अपनी माँ से
कभी कोई न बिछड़े अपनी माँ से
यही है मेरी एक मात्र दुआ उस खुदा से
जिनकी माँ हो, उसे क्या पता कि माँ क्या होती है
माँ को जानना है तो उनसे पूछो जिनकी माँ नहीं होती है