Log bhi aaj kal kya khoob wafa nibhate hai niyat apni kharab Doshi kismat ko thehrate hain
लोग भी आज कल क्या खूब वफा निभाते हैं नियत अपनी खराब दोषी किस्मत को ठहराते हैं 💔
Log bhi aaj kal kya khoob wafa nibhate hai niyat apni kharab Doshi kismat ko thehrate hain
लोग भी आज कल क्या खूब वफा निभाते हैं नियत अपनी खराब दोषी किस्मत को ठहराते हैं 💔

तुझें कुछ भी न करना हैं,
मुझको दिवाना बनाने के लिए,
तेरी ये आंखों का काजल ही काफी है,
मेरी धड़कनों को बढ़ाने के लिए….
पाया तुझें तो सपने भी सच लगने लगे,
तुम अज़नबी से आज मेंरे अपने लगने लगे,
होता नहीं यकीन अपने खुद के किस्मत पर,
तुम मेरी धड़कन में कुछ इस तरह बसने लगे..