कितना फासला था हमारे दरमियान,
उन्हें हमारा मिलना ज़रूरी नहीं था,
हमें हमारा बिछड़ना मंज़ूर नहीं था……🖤
कितना फासला था हमारे दरमियान,
उन्हें हमारा मिलना ज़रूरी नहीं था,
हमें हमारा बिछड़ना मंज़ूर नहीं था……🖤
Udh rahe kabootar shehar me
enhe shant kaun karega
yadi ham shareef ho gaye
to kaandd kaon karega
उड़ रहे कबूतर शहर में,
इन्हे शांत कौन करेगा;
यदि हम शरीफ हो गए,
तो कांड कौन करेगा।
Jab khuda ne MAA ka astitva bnaya uska ek ek jaadoo kisi aur ne churaya mohabbat, hifajat, barkat jo khuda ka kaam tha ye sab bhi ab maa ka duja naam tha dekhte hi dekhte koi aur parvardigaar hogyaa Maa ko bna kar KHUDA berojgaar hogya……
जब खुदा ने मां का अस्तित्व बनाया उसका एक एक जादू किसी ओर ने चुराया मोहब्बत हिफाज़त बरकत जो खुदा का काम था ये सब भी अब मां का दूजा नाम था देखते ही देखते कोई और परवरदिगार हो गया ”मां” को बना कर खुदा बेरोजगार हो गया….