उतरा है मेरे दिल मे कोई चांद नगर से
अब हो गया इश्क अंधेरे के सफर से
वो बात है तुझमे कोई तुझसा नही कही
नज़र ना लग जाये तुझको मेरी नज़र से
Mukul
Enjoy Every Movement of life!
उतरा है मेरे दिल मे कोई चांद नगर से
अब हो गया इश्क अंधेरे के सफर से
वो बात है तुझमे कोई तुझसा नही कही
नज़र ना लग जाये तुझको मेरी नज़र से
Mukul

कड़ी धूप हो या हो शीतकाल,
हल चलाकर न होता बेहाल.
रिमझिम करता होगा सवेरा,
इसी आस में न रोकता चाल.
खेती बाड़ी में जुटाता ईमान,
महान पुरूष हैं, है वो किसान.
छोटे-छोटे से बीज बोता,
वही एक बड़ा खेत होता.
जिसकी दरकार होती उसे,
बोकर उसे वह तभी सोता.
खेतो का कण-कण हैं जिसकी जान,
महान पुरूष है, है वो किसान.
तरुण चौधरी