Haaseyan de naal kise sog di trah..!!
Lagja tu rooh nu koi rog di trah..!!
ਹਾਸਿਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਸੋਗ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ..!!
ਲੱਗ ਜਾ ਤੂੰ ਰੂਹ ਨੂੰ ਕੋਈ ਰੋਗ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ..!!
Haaseyan de naal kise sog di trah..!!
Lagja tu rooh nu koi rog di trah..!!
ਹਾਸਿਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਸੋਗ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ..!!
ਲੱਗ ਜਾ ਤੂੰ ਰੂਹ ਨੂੰ ਕੋਈ ਰੋਗ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ..!!
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं
kaise bhula doon us bhoolane vaale ko main,
maut insaanon ko aatee hai yaadon ko nahin..
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं,
मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं..