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Kuch ankahi baatein || only shayari

Sayad main tujhe kvi keh na sku

Tu kitna khas h mere liye

Bs dil me khwahish liye

Ye sochti hu kmse km tu paas to h mere

Janti hu tu paas ho kr v bohot dur h mujhse

Phir v mera sb kuch h tujhse

Jb maine tujhe pehli baar dekha us waqt aisa lga jaise tu aaya hi h mere liye

Jb tujhse baatein hui to lga ki bs tujhe sunti rhu

Jb tujhse pehli bar mili tb aisa lga jaise wo saam ruk jaaye or tere paas main baithi rhu 

Jb tune pehli bar chuwa dhadkanein tej ho gyi or tb pta chla tu kya h mere liye 

Aaj v us ek pal ka intezaar h mujhe

Kaise bdh jaaun aage iss duniya me 

Tu hi to ek duniya h mere liye … 

Maana thori si naadan hu main pr is naadani me v kitna pyar krti hu tujhse 

Tera chehra ek baar dikh jaaye to aankhe nam ho jaati h 

Teri mehek aaj v teri yaad dila jaati h 

Tu mujhse kitna v door ho jaaye pr ye dil maine rkh di h ab tere liye

sikaayaton me mza tvi h jb tu ho mere pas sunne k liye.. Aaj v meri aankhein tarasti h tujhe ek baar dekhne k liye

Zindagi bhr tere saath rehna tha pr teri khushi k liye v to maine duwa maanga tha 

Tu mere sath reh ya na reh teri yaadein hmesha rhengi 

Tujhe zindagi bhr k liye apne sath rkha h maine , tu meri yaadon me kaid hai hmesha k liye q ki ye intejar v to rhega aankhri saans tk k liye.

Title: Kuch ankahi baatein || only shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


zyada pyaar menu || shayari sad Punjabi

K tennu jinni nafrat mere to
Ode to zyada menu pyaar tere naal hai
Tenu te shakal vi ni pasand meri
Ki kra saddi kismat da j bura haal hai

Title: zyada pyaar menu || shayari sad Punjabi


आगरा कौन सा रास्ता जाता है? || birbal akbar story

बादशाह अकबर को शिकार करना बहुत पसंद था। एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकले। शिकार करते-करते वो इतने आगे चले गए कि वो अपने दल से छूट गए। उनके साथ बस कुछ ही सैनिक रह गए थे। अब शाम होने को थी और सूरज ढलने वाला था। साथ ही अकबर और उनके साथ के सैनिकों को भूख भी सताने लगी थी।

बादशाह अकबर को शिकार करना बहुत पसंद था। एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकले। शिकार करते-करते वो इतने आगे चले गए कि वो अपने दल से छूट गए। उनके साथ बस कुछ ही सैनिक रह गए थे। अब शाम होने को थी और सूरज ढलने वाला था। साथ ही अकबर और उनके साथ के सैनिकों को भूख भी सताने लगी थी

काफी दूर निकल आने पर बादशाह अकबर को यह एहसास हुआ कि वो रास्ता भटक गए हैं। वहां आस-पास कोई नजर भी नहीं आ रहा था, जिससे रास्ते के बारे में पूछा जा सकता था। थोड़ी दूर और चलने पर उन्हें एक तिराहा नजर आया। बादशाह को यह देख कर थोड़ी खुशी हुई कि चलो इनमें से कोई न कोई रास्ता राजधानी तक तो जाता ही होगा।

लेकिन, सभी इसी उलझन में थे कि किस रास्ते पर चला जाए। तभी सैनिकों की नजर सड़क किनारे खड़े एक छोटे से लड़के पर पड़ी। वह लड़का बड़ी हैरानी से महाराज के घोड़े और सैनिकों के हथियारों को देख रहा था। सैनिकों ने उस बालक को पकड़कर महाराज के सामने पेश किया।

बादशाह अकबर ने लड़के से पूछा, “ऐ लड़के। इनमें से कौन सा रास्ता आगरा जाता है?” यह बात सुनकर वह बच्चा जोर-जोर से हंसने लगा। यह देखकर राजा को बहुत गुस्सा आया। लेकिन, उन्होंने शांत भाव से उससे उसकी हंसी का कारण पूछा। लड़के ने जवाब दिया, “यह रास्ता चल नहीं सकता है, तो यह आगरा कैसे जाएगा। आगरा पहुंचने के लिए तो आपको खुद चलना पड़ेगा।”

महाराज उस लड़के की सूझबूझ को देख कर चकित रह गए। उन्होंने प्रसन्न होकर उस बच्चे का नाम पूछा। लड़के ने जवाब में अपना नाम महेश दास बताया। महाराज ने उसे इनाम में सोने की अंगूठी दी और दरबार में आने का न्योता दिया। इसके बाद बादशाह अकबर ने लड़के से पूछा, “क्या तुम मुझे बता सकते हो कि किस रास्ते पर चलने से मैं आगरा पहुंच पाऊंगा?” लड़के ने बड़ी ही शालीनता से सही रास्ता बताया और महाराज अपने सैनिकों के साथ आगरा की ओर चल पड़े।

यही लड़का बड़ा होकर बीरबल के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक कहलाया।

Title: आगरा कौन सा रास्ता जाता है? || birbal akbar story