” Kuch is trha uljhi he mere hatho ki lakeere
uski lakiro ke sath…
Adhure jo hm hue,
To muqammal wo b nhi honge.…”
By Zareen khan…
” Kuch is trha uljhi he mere hatho ki lakeere
uski lakiro ke sath…
Adhure jo hm hue,
To muqammal wo b nhi honge.…”
By Zareen khan…
प्यारा की बैचेन गर्मी एक दिन बारिश में ठंडी भी हो जायेगी।
और जब हाथ में एक जाम हो और बाहों में उसका सर तो बात ही बन जाती है।।
जिंदगी जख्मों से भरी है वक्त को मरहम बनाना सिख लों, हारना तो है ही मौत के सामने पहले जिंदगी से जीना सिख लो।
दुनिया चुप रहती कब हैं,
कहने दो जो कहती है