” Kuch is trha uljhi he mere hatho ki lakeere
uski lakiro ke sath…
Adhure jo hm hue,
To muqammal wo b nhi honge.…”
By Zareen khan…
” Kuch is trha uljhi he mere hatho ki lakeere
uski lakiro ke sath…
Adhure jo hm hue,
To muqammal wo b nhi honge.…”
By Zareen khan…
kade socheyaa hi nahi c ke
asi v ishq ch haara ge
tere bina taa kade rehna v nahi sikhyaa
aur aaj saal ho gya
pata nahi c ke tere ton begair v asi ji paalange
ਕਦੇ ਸੋਚਿਆ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਕਿ
ਅਸੀਂ ਵੀ ਇਸ਼ਕ ਚ ਹਾਰਾਂ ਗੈ
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾ ਤਾਂ ਕਦੇ ਰੇਹਨਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸਿਖਿਆ
ਔਰ ਆਜ ਸਾਲ ਹੋ ਗਿਆ
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਸੀ ਕਿ ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਵੀ ਅਸੀਂ ਜੀ ਪਾਲਾਂ ਗੈ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।