आओ मिलकर पेड़ लगाएं
पृथ्वी को हरा-भरा बनाए
पेड़ों के मीठे फल खाएं
फूलों की सुगंध फैलाएं
पेड़ों से छाया हम पाएं
चारों ओर प्राणवायु फैलाएं
मिट्टी को उपजाऊ बनाएं
भूजल स्तर को यह बढ़ाएं
बारिश का पानी ये ले आए
मिट्टी के कटाव को ये बचाएं
पक्षी इनपर अपना नीड़ बनाए
प्रदूषण से ये हमें बचाएं
जब पेड़ों से लाभ इतना पाएं
तो मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए
इन पेड़ों को क्यूं सताए
इनके संरक्षण की कसम हम खाएं
आओ मिलकर पेड़ लगाएं
आओ मिलकर पेड़ लगाएं…
तरुण चौधरी
vo bhee jinda hai,
main bhee jinda hoon,
qatl sirph ishq ka hua hai.….
वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ,
क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है.….