zindagi da kujh pata nahi
maut da bas hun intezaar hai
hun aas v nahi bachan di
mera jina v kehdha kise de lai khaas hai
ਜਿੰਦਗੀ ਦਾ ਕੁਝ ਪਤਾ ਨਹੀਂ
ਮੋਤ ਦਾ ਬਸ ਹੁਣ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਹੈ
ਹੁਣ ਆਸ ਵੀ ਨਹੀਂ ਬਚਨ ਦੀ
ਮੇਰਾ ਜਿਨਾ ਵੀ ਕੇਹੜਾ ਕਿਸੇ ਦੇ ਲਈ ਖਾਸ ਹੈ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
zindagi da kujh pata nahi
maut da bas hun intezaar hai
hun aas v nahi bachan di
mera jina v kehdha kise de lai khaas hai
ਜਿੰਦਗੀ ਦਾ ਕੁਝ ਪਤਾ ਨਹੀਂ
ਮੋਤ ਦਾ ਬਸ ਹੁਣ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਹੈ
ਹੁਣ ਆਸ ਵੀ ਨਹੀਂ ਬਚਨ ਦੀ
ਮੇਰਾ ਜਿਨਾ ਵੀ ਕੇਹੜਾ ਕਿਸੇ ਦੇ ਲਈ ਖਾਸ ਹੈ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷

Jinna naal pyaar hunda
ohna ton hi aksar apni nmoshi hundi aa
jo hasde chehre hunde ne
ohna pichhe ik dungi khamoshi hundi aa
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।