
aur kabhi pukaarta hai wo
kuchh to hai in raat ke sanaatton me

वो बाहों में मुझे लेके,,,
शादी किसी और से रचाना चाहता है,,,
वो हम बिस्तर तो होता है,,,
हमसफर किसी और को बनाना चाहता है,,,
वो वक्त काटता मेरे साथ है,,,
वक्त बिताना किसी और के साथ चाहता है,,,
वो मुस्कुराता मेरे साथ है,,,
वो मुस्कान किसी और का बनना चाहता है,,,
वो हाथ थामे तो मेरा चलता है,,,
वो जिंदगी का सफर किसी और के साथ चलना चाहता है,,,
वो बाहों में मुझे लेके,,,
शादी किसी और से रचाना चाहता है….।।
Aive gairaan piche bhajh, na eh zindagi barbaad kar
bandeyaa, tu apne andron apne aap di talaash kar
ਐਂਵੇਂ ਗੈਰਾਂ ਪਿੱਛੇ ਭੱਜ
ਨਾ ਇਹ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਬਰਬਾਦ ਕਰ
ਬੰਦਿਆ, ਤੂੰ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰੋਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਦੀ ਤਲਾਸ਼ ਕਰ