
aur kabhi pukaarta hai wo
kuchh to hai in raat ke sanaatton me

Dunghiyan nigahan ch udaasi te
bulla te chupi chaa jandi e
Jad door door tak tu kidre nazar nahi aunda..!!
ਡੂੰਘੀਆਂ ਨਿਗਾਹਾਂ ‘ਚ ਉਦਾਸੀ ਤੇ
ਬੁੱਲਾਂ ‘ਤੇ ਚੁੱਪੀ ਛਾ ਜਾਂਦੀ ਏ
ਜਦ ਤੂੰ ਦੂਰ ਦੂਰ ਤੱਕ ਕਿੱਧਰੇ ਨਜ਼ਰ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ..!!
ना हुस्न से, ना सूरत से, ना तेरी अदाओं से दिल बेचैन है…
तेरे जिस्म का घायल करने वाला हिस्सा, तो सिर्फ़ तेरे नैन हैं..
देखा जो तूने, लगा लहरों पे चलती, ठंडी हवाओं का झोंका है..
क्या समझ इस इशारे में, कुछ था, या मेरी नजरों का धोखा है..
अब ना दिन में चैन है, ना रातों को सुकून मिलता है..
क्या तुझे लगता है, के किसी रांझे से मेरा खून मिलता है..??
अब तू ही सुलझा ये गुत्थी, जो मेरे ज़हन में चल रही है..
क्या ये आग ठीक है, प्यार की, जो मेरे सीने में जल रही है..?