
Labhde nahi alfaaz dard byan karn nu
ronda e dil rooh chahundi e maran nu
jadon gaye is bekadri duniyaa ton
koi murjaayea ful v nai labhna sadhi kabar
te dharan nu

Labhde nahi alfaaz dard byan karn nu
ronda e dil rooh chahundi e maran nu
jadon gaye is bekadri duniyaa ton
koi murjaayea ful v nai labhna sadhi kabar
te dharan nu
कुछ हलचल सी है सीने में
सुकून कुछ खोया – सा है
जाने कैसी है ये अनुभूति
दिल कुछ रोया – सा है
कुछ आहट सी आयी है
और दिल कुछ धड़का – सा है।
हाथ – पाँव में हो रही कंपन-सी
बेचैनी ये जानी पहचानी – सी है
सांसे भी है कुछ थमी – सी
कितने वक्त गुज़र गये इन्तजार में
मेरी आहें भी हैं कुछ जमी – सी।
पलकें अब मूँदने लगी हैं
साँसें अब क्षीण पड़ रही हैं
अब तो आ जाओ इन लम्हों में
जाने कब लौटोगे?
आने का वादा था और ना भी था तो,
तुम्हारा इन्तज़ार तो था..
सारी हदें तोड़ कर आ जाओ
दुनिया की रस्मों को छोड़ कर आ जाओ
चंद लम्हों के लिए ही,
अब तो आ जाओ
मेरे लिए.. सिर्फ मेरे लिए |
किसी के पास सब कुछ हो,
तो जलती है दुनियाँ,
किसी के पास कुछ ना हो,
तो हँसती है दुनियाँ,
लेकिन मेरे पास तो मेरे माँ-बाप है,
जिसके लिए तरसती है दुनियाँ!
Kisi ke paas sab kuchh ho,
to jalti hai duniyan,
kisi ke paas kuchh na ho,
to hansti hai duniyan,
lekin mere paas to mere maa-baap hai,
jisake lie tarsti hai duniyan!