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Shayari | Latest Shayari on Hindi, Punjabi and English

Unke liye hum galat the || Hindi shayari || sad shayari

Na rah mili Na manzil mili
Sath hamare bas gam the
Vo to hmesha se hi sahi the
Unke liye sirf hum galat the 💔

ना राह मिली ना मंज़िल मिली।
साथ हमारे बस गम थे।।
वो तो हमेशा से ही सही थे।
उनके लिए सिर्फ गलत हम थे।।💔

बेटी का स्कूल || bachpan poetry || Hindi shayari

कल स्कूल खुलेंगे कई दिन बाद
क़ैद से निकलेंगी बच्चियाँ
नए-पुराने दोस्तों से मिलेंगी
मेरी बच्ची भी जाएगी स्कूल
फ़रहाना के साथ लंच शेयर करेगी
जेनिस के साथ खूब बातें करेगी
रवनीत बनेगी बेंच पार्टनर
फ़रहाना बताएगी वॉटर पार्क के क़िस्से
छपछप करती है वह अक्सर जाकर
जेनिस बताएगी कैसे मुर्ग़े की आवाज़ निकालकर
खिड़की के बाहर आता है रोज़
ग़ुब्बारे वाला
रवनीत बताएगी
गुरुद्वारे जाकर दुखभंजनी साहब गाती है वह
हर बुधवार
मेरी बच्ची भी बताएगी
नई जगहों के बारे में
जहाँ मम्मी ले जाती है उसे
बताएगी कोर्ट गयी थी घूमने
पिछले मंगलवार
कोर्ट एक मस्त जगह है
जहाँ मम्मी-पापा बिल्कुल नहीं लड़ते
सिर्फ़ प्यार करते हैं मुझसे।
बताएगी फ़रहाना को
वॉटर पार्क से बुरा नहीं है थाने जाना
पुलिस वाले अंकल देते हैं ख़ूब सारी टॉफ़ियाँ
और पापा से काफ़ी देर बातें करते हैं।
जेनिस को बताएगी
घर पर आती रहती है पुलिस
जैसे उसके यहाँ आता है ग़ुब्बारे वाला।
अगली बार आई पुलिस तो
वह रवनीत से सीखकर
गाएगी दुखभंजनी साहेब
और रोएगी बिल्कुल नहीं।

Vo yarana || Hindi shayari || true lines

Vo yarana vo mastiya
Vo mehfile ab nhi sajti
Ab vo yaar nhi milte 💯✨

वो याराना वो मस्तियाँ।
वो महफ़िले अब नही सजती।
अब वो यार नही मिलते।💯✨

Ishq dard || Hindi shayari || beautiful lines

कहते हैं जिसे लोग इश्क़, प्यार, दर्द है
ख़ुशियाँ हैं इसमें झूठ मेरे यार दर्द है
जिनको ये दर्द ना मिला वो चीखते रहे
जिनको मिला उनके लिए बेकार दर्द है
ऐसा नहीं कि आज हुआ कल नहीं हुआ
ये दर्द है तो दर्द है हर बार दर्द है. 🙂🥀

छोटे भाई पर कविता || Brother poetry || Hindi poetry

सदा तुम नफरत करते हो ,पर तुमको मुझसे प्यार हैं
मेरा प्रेम हैं हल्का फुल्का , पर ये नफरत तुम पर ही भार हैं |

जो नफरत बन फुट पड़ी हैं , बस वही प्यार का सार हैं
चाहे जितनी शिद्दत कर लो , मुझको यह स्वीकार हैं ,

भैया तुम क्या जानो कितना प्यार मुझसे करते हो
अपने दिल के हाथों तुम , इतना क्यों बेजार हो

तेरे दर पर जब आउंगी क्या दूर खड़े ही पाओगे
निश्चल जड़ बन खड़े रहोगे , आँख में भर ना पाओगे |

मामा कह जब वे दौड़ेंगे ,क्या उन्हें गोद में न ले पाओगे
बच्चों की मुस्कान देख तुम , क्या निष्ठुर रह पाओगे

जब शादी होगी तेरी तो क्या जीजू से द्वेष मनाओगे
बहने करती हैं जो रश्मे ,वो किस्से करवाओगे

कोन करेगा टिका तेरा , हल्दी किससे लगवाओगे
बहन से होगी इतनी नफरत तो, गैरो से खाक निभाओगे

प्यार में ज्यादा शक्ति हैं या नफरत में हैं बताओगे
मैं तुम्हे चुनोती देती हैं , तुम नफरत करके दिखलाओगे

तुम गुस्से को मत शांत करो ,और नफरत मुझेसे करते रहना
स्नेह की अग्नि पावन हैं , तुम ही पिघलोगे ये कहती बहना

बड़े भाई पर कविता || brother poetry || Hindi poetry

हर ख़ुशी में हर गम में आपका साथ हो
मेरे भाई तुम पापा के सर ताज हो
सभी बहनों की खुशियों का तुम ही एक राज हो
तुम ही तो रक्षाबन्धन (राखी) की लाज हो
वैसे तो पत्थर की तराह कठोर हो
लेकिन पर मुसीबत आने पर मोम की तरह पिघलते हो |
कैसे जाने बिन बताये मन की बात कैसे जान लेते हो
बहनों की परेशानीयों को अपनी मान लेते हो
हर ख़ुशी में हर गम में आपका साथ हो
मेरे भाई तुम पापा के सर ताज हो

माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry

पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.

आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

खामोशी मेरी जुबान को  सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने  भर दिया.

अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.

वह रात  छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.

ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.

पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.

लगता था तू आएगी बहुत  डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.

चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.

जाना चाहती हूं  उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.

जब तेरे बिना लोरियों  कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

lafzo ko kya samjhenge || sad but true || Hindi shayari

Sad but true || jawab to har baat ka diya ja sakta hai magar.... jo humein na samajh paye vo lafzo ko kya samjhenge 🥀
jawab to har baat ka diya ja sakta hai magar…. jo humein na samajh paye vo lafzo ko kya samjhenge 🥀