Guroor e mohobbat
Chadeya Suroor e mohobbat
Nasha Junoon e mohobbat..!!
ਗਰੂਰ ਏ ਮੋਹੁੱਬਤ
ਚੜ੍ਹਿਆ ਸਰੂਰ ਏ ਮੋਹੁੱਬਤ
ਨਸ਼ਾ ਜਨੂੰਨ ਏ ਮੋਹੁੱਬਤ..!!
कोई भी जहर को मीठा नहीं बताता है।
कल अपने आप को देखा था माँ की आँखों में
ये आईना हमे बूढ़ा नहीं बताता है।
ए अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखे खोल दी घर में उजाला हो गया।
किस तरह वो मेरे गुनाहो को धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
बुलंदियों का बड़े से बड़ा नीसान छुआ
उठाया गोद में माँ ने तब आसमान छुआ।
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आयी
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आयी।